
{ NOTE : MAI AP SBKO BTA DU KI YE AP APNE RISK PAI PADHNA KYU KI YE STORY MAI 21 + BESS PR LIKH RHI HU KUCH ESA BHI YA JO AP KO PHDHNE MAI COMFTBEL NA BHI LAGE TO FIR MUJ MAT KHNA
ISME VO BHI WORD US KRUOGI JO apka uncomftble kr skta hai to apne owen risk pr pdhe }
मल्होत्रा परिवार का मेंशन,
जिसे दुनिया "मल्होत्रा पैलेस" के नाम से जानती है, दिल्ली के सबसे पॉश इलाके में 50 एकड़ की विशाल जमीन पर बना हुआ है। ये मेंशन सिर्फ एक घर नहीं, बल्कि एक शाही महल की तरह है, जो पुरानी रियासतों की भव्यता को टक्कर देता है। इसका आर्किटेक्चर इतना शानदार है कि इसे देखकर हर कोई दंग रह जाता है। मेंशन का बाहरी हिस्सा सफेद मार्बल और ग्रेनाइट से बना है, जिस पर नक्काशी इतनी बारीक है कि मानो हर दीवार अपनी कहानी कह रही हो। मेंशन के मुख्य दरवाजे पर सोने की परत चढ़ी है, और इसके चारों तरफ 12 फव्वारे हैं, जो रात में रंग-बिरंगी लाइट्स के साथ चमकते हैं।
मेंशन के अंदर का नजारा और भी कमाल है। 30 कमरे, 5 ग्रैंड हॉल, एक प्राइवेट थिएटर, एक इंडोर स्विमिंग पूल, और एक लाइब्रेरी जो पुरानी किताबों और आर्टवर्क से भरी हुई है। हर कमरे की सजावट में इटैलियन मार्बल, क्रिस्टल झूमर, और रेयर पेंटिंग्स का इस्तेमाल हुआ है। मेंशन का सेंट्रल हॉल इतना बड़ा है कि उसमें 500 लोग आसानी से पार्टी कर सकते हैं। इसके अलावा, मेंशन के पीछे एक विशाल गार्डन है, जो 10 एकड़ में फैला हुआ है। इस गार्डन में विदेशी पेड़-पौधे, एक मिनी फाउंटेन, और एक छोटा सा तालाब है, जहां रंग-बिरंगे मछलियां तैरती हैं। गार्डन में एक खास पवेलियन भी है, जहां मल्होत्रा परिवार अक्सर सुबह की चाय या इवनिंग पार्टीज का मजा लेता है।
इसी गार्डन के पवेलियन में उस सुबह राजेश मल्होत्रा और उनकी पत्नी सुनीता मल्होत्रा बैठे थे। दोनों की मौजूदगी ऐसी थी कि कोई भी देखकर समझ जाए कि ये लोग कितने प्रभावशाली और रसूखदार हैं। राजेश मल्होत्रा, 65 साल के हैं, लेकिन उनकी जवानियां अभी भी उनके चेहरे पर झलकती है। लंबा कद, गठीला शरीर, और चेहरे पर एक तेज जो हर किसी को उनकी तरफ खींच लेता है। उनके बाल अब थोड़े सफेद हो गए हैं, लेकिन उनकी आंखों में वही चमक और आत्मविश्वास है, जो उन्हें बिजनेस की दुनिया में नंबर वन बनाता है। वो हमेशा टेलर्ड सूट या ट्रेडिशनल कुर्ता-पायजामा पहनते हैं, जो उनकी पर्सनैलिटी को और निखारता है।
सुनीता मल्होत्रा, 62 साल की, लेकिन उनकी खूबसूरती आज भी लोगों को हैरान करती है। लंबे काले बाल, जो अब हल्के ग्रे हो रहे हैं, और एक चेहरा जो आज भी जवानी की मिसाल देता है। उनकी साड़ियां और जूलरी हमेशा सबसे अलग होती हैं, चाहे वो ट्रेडिशनल सिल्क साड़ी हो या डिजाइनर लहंगा। उनकी मुस्कान में एक अजीब सा सुकून है, जो हर किसी को अपना बना लेता है। सुनीता की पर्सनैलिटी में ग्रेस और कॉन्फिडेंस का गजब का मेल है। वो न सिर्फ मल्होत्रा परिवार की रीढ़ हैं, बल्कि चैरिटी और सोशल वर्क में भी उनका बड़ा नाम है।
उस सुबह, दोनों पवेलियन में चाय पी रहे थे। राजेश जी ने सुनीता की तरफ देखते हुए कहा, "वैसे, तुम्हारा बेटा कहीं नजर नहीं आ रहा। उसे पता है ना आज कितना बड़ा दिन है? हमें 10 बजे निकलना है।"
सुनीता ने हल्की सी मुस्कान के साथ जवाब दिया, "हां...हां... उसे पता होगा। वैसे आज इतना बड़ा दिन है, इसलिए अनन्या विक्रम को अपने साथ मंदिर ले गई है।" फिर थोड़ा इमोशनल होते हुए बोलीं, "बेचारी बच्ची की कितने सालों की मुराद आज पूरी होने वाली है। आखिर भगवान ने उसकी सुन ही ली। मुझे आज भी याद है जब वो उस हादसे से गुजरी थी, और पूरे 8 महीने तक उससे उबर नहीं पाई थी।"
सुनीता को इमोशनल देख राजेश जी उनके पास आए, उन्हें गले लगाया और बोले, "जो बीत गया, सो बीत गया। अब बीती बातों को तो हम बदल नहीं सकते। चलो, रेडी हो जाते हैं।" सुनीता ने हल्के से सिर हिलाया, और दोनों अपने कमरे में चले गए।
दरअसल, वो दोनों अनन्या की बात कर रहे थे, जो उनके बेटे विक्रम की पत्नी और मल्होत्रा परिवार की बहू है। सुनीता और राजेश अनन्या को अपनी सगी बेटी की तरह प्यार करते हैं। अनन्या, राजेश जी के जिगरी दोस्त कपूर साहब की बेटी है। विक्रम और अनन्या की मुलाकात कॉलेज में हुई थी। विक्रम उस वक्त अपने मास्टर्स के लास्ट ईयर में था, और अनन्या ने फर्स्ट ईयर शुरू किया था। दोनों पहले से ही फैमिली फ्रेंड्स होने की वजह से एक-दूसरे को जानते थे, लेकिन कॉलेज में उनकी दोस्ती प्यार में बदल गई।
लेकिन 18 साल की उम्र में अनन्या प्रेग्नेंट हो गई। उस वक्त अनन्या ने हिम्मत दिखाई और सबको सच बता दिया। मल्होत्रा और कपूर परिवार दोस्ती से रिश्तेदारी में बदल गए। लेकिन जब अनन्या का सातवां महीना चल रहा था, वो सीढ़ियों से गिर गई, और उसका मिसकैरेज हो गया। इतनी छोटी उम्र में अपने बच्चे को खो देना, जिसके लिए अनन्या ने अपना करियर और सपने छोड़ दिए थे, उसे डिप्रेशन में धकेल गया।
हादसे ने अनन्या को और गहरा जख्म दिया, क्योंकि उस दौरान उसका यूटरस निकालना पड़ा, जिसके बाद वो कभी मां नहीं बन सकती थी। लेकिन इस मुश्किल वक्त में विक्रम और दोनों परिवारों ने उसे संभाला। शादी के 17 साल बाद भी, किसी ने अनन्या को बच्चे की वजह से कभी ताना नहीं मारा। न ही कभी किसी ने दबाव डाला कि बच्चा गोद लो। लेकिन अनन्या का मन था कि वो मां बने, इसलिए उसने और विक्रम ने मिलकर एक बच्ची को गोद लेने का फैसला किया।
उन्होंने एक 15-16 साल की लड़की को गोद लेने का सोचा, क्योंकि अगर उनकी अपनी बेटी होती, तो वो इतनी ही उम्र की होती। अनन्या 35 साल की है, और उसकी खूबसूरती किसी स्वर्ग से उतरी अप्सरा जैसी है। लंबे घने बाल, बड़ी-बड़ी आंखें, और एक ऐसी मुस्कान जो दिल को छू ले। वो ज्यादातर ट्रेडिशनल और डिजाइनर कपड़े पहनती है, जो उसकी ग्रेस को और बढ़ाते हैं। उसकी पर्सनैलिटी में एक अजीब सी सादगी और आत्मविश्वास है, जो उसे सबसे अलग बनाता है।
विक्रम, 39 साल का, इतना हैंडसम कि किसी हॉलीवुड हीरो को भी मात दे दे। लंबा कद, चौड़ा सीना, और एक ऐसी स्माइल जो किसी को भी दीवाना बना दे। वो बिजनेस की दुनिया में अपने पिता का नाम और ऊंचा ले जा रहा है। उसकी ड्रेसिंग सेंस कमाल की है—चाहे वो सूट हो या कैजुअल शर्ट, वो हमेशा परफेक्ट दिखता है। उसकी पर्सनैलिटी में एक मैग्नेटिक चार्म है, जो हर किसी को उसकी तरफ खींच लेता है।
आज का दिन अनन्या और विक्रम के लिए खास था, क्योंकि वो उस बच्ची को गोद लेने जा रहे थे, जो उनकी जिंदगी में नई खुशियां लाने वाली थी। मल्होत्रा परिवार का ये मेंशन, जो बाहर से शाही लगता है, अंदर से प्यार, एकता, और इंसानियत की मिसाल है।
अनाथ आश्रम, जो दिल्ली के एक शांत इलाके में बसा था, एक छोटा सा लेकिन प्यार और देखभाल से भरा हुआ ठिकाना था। इस आश्रम में रहती थी 15-16 साल की राहा , एक ऐसी लड़की जिसकी मासूमियत और खूबसूरती देखकर हर कोई उसका दीवाना हो जाए। राहा का कमरा छोटा सा था, लेकिन उसमें उसकी पूरी दुनिया बसी थी। कमरे में एक प्यारा सा पिंक बेड था, जिस पर फूलों वाला बेडशीट बिछा था। बेड के पास एक छोटी सी अलमारी थी, जिसमें रिहा के कुछ कपड़े और उसका सबसे कीमती सामान—एक क्यूट सा टेडी बेयर, जिसे वो "डोडो" बुलाती थी। कमरे की दीवारें हल्के गुलाबी रंग की थीं, और एक दीवार पर रिहा ने अपने हाथों से बनाए कुछ रंग-बिरंगे स्केच चिपकाए थे। एक छोटी सी खिड़की थी, जिसके बाहर से गार्डन का नजारा दिखता था, और सुबह-सुबह धूप की किरणें कमरे को और भी खूबसूरत बना देती थीं। कमरे में एक छोटा सा टेबल भी था, जिस पर राहा की किताबें
रिहा की खूबसूरती ऐसी थी कि उसे देखकर लगता था मानो कोई गुड़िया जिंदा हो गई हो। उसका गोरा रंग इतना नाजुक था कि हल्का सा छूने से भी लाल हो जाए। उसकी बड़ी-बड़ी काली आंखें, जिनमें मासूमियत का सागर लहराता था, किसी को भी अपने जादू में बांध लेती थीं। लंबे, घने बाल, जो हमेशा एक चोटी में बंधे रहते,
और उसकी मुस्कान—ऐसी कि मानो सारी दुनिया की उदासी पल भर में गायब हो जाए। रिहा की आवाज इतनी मीठी थी कि जब वो बोलती, तो लगता जैसे कोई गाना गा रही हो। वो ज्यादातर साधारण सलवार-कमीज या फ्रॉक पहनती थी, लेकिन उसकी सादगी ही उसकी खूबसूरती को चार चांद लगाती थी। उसकी मासूमियत ऐसी थी कि उसे दुनिया की कोई समझ नहीं थी। वो बस अपने छोटे से संसार में खुश थी—अपने डोडो के साथ, अपनी किताबों के साथ, और अपने सपनों के साथ।
आश्रम की केयरटेकर, मीना जी, एक 50 साल की दयालु महिला थीं, जिन्होंने रिहा को अपनी बेटी की तरह पाला था। मीना जी का इरादा कभी गलत नहीं था।
वो रिहा को इतना प्यार करती थीं कि उसे बाहर की दुनिया की कठिनाइयों से बचाना चाहती थीं। रिहा की खूबसूरती और उसकी मासूमियत को देखकर मीना जी को हमेशा डर रहता था कि कहीं कोई उसका गलत फायदा न उठा ले।
इसलिए उन्होंने रिहा को कभी आश्रम से बाहर नहीं जाने दिया। रिहा की पढ़ाई भी आश्रम में ही होती थी। वो सिर्फ एग्जाम देने स्कूल जाती थी, वो भी मीना जी के साथ। मीना जी ने रिहा को कभी गोद लेने के लिए किसी के सामने पेश नहीं किया, क्योंकि वो उसे अपने पास ही रखना चाहती थीं। लेकिन जब मल्होत्रा परिवार की बात आई, जिनकी दयालुता और अच्छाई की मिसाल पूरी दिल्ली में मशहूर थी,
तो मीना जी को लगा कि रिहा के लिए इससे बेहतर परिवार नहीं मिल सकता। उन्होंने मल्होत्रा परिवार को रिहा की सारी डिटेल्स दीं और उनके इरादों पर भरोसा किया।
उस सुबह,
रिहा अपने कमरे में अपने पिंक बेड पर बैठी थी, अपने टेडी बेयर डोडो को गोद में लिए। उसकी मासूम सी आवाज में वो डोडो से बात कर रही थी,
मानो वो उसका सबसे प्यारा दोस्त हो। उसकी आवाज इतनी प्यारी थी कि सुनकर किसी का भी दिल पिघल जाए। रिहा ने डोडो से कहा, "डोडो, तुझे पता है, आज बेबी के मम्मा-डैडा आने वाले हैं। अब रिहा भी सबकी तरह अपने घर जाएगी। जैसे कल बेबी गया था ना, अब मैं भी जाऊंगी। वहां मम्मा होंगी, डैडा होंगे, दादू होंगे, दादी होंगी। बहुत मजा आएगा, फिर हम खूब खेलेंगे।"
फिर उसने थोड़ा रुककर, अपनी काली आंखों में ढेर सारे सपने समेटे हुए कहा, "अब रिहा को अकेले खाना नहीं खाना पड़ेगा, क्योंकि मम्मा रिहा को खिलाएंगी। और रिहा को अकेले सोना भी नहीं पड़ेगा, क्योंकि रिहा डैडा के पास सो जाएगी। कितना मजा आएगा ना, डोडो?"
उसकी बातों में इतनी मासूमियत थी कि मानो वो अपने सपनों की दुनिया में खो गई हो।
कमरे के बाहर, पांच लोग खड़े थे—विक्रम, अनन्या, राजेश जी, सुनीता जी, और मीना जी। वो सब रिहा की बातें सुन रहे थे। रिहा की मासूम बातों ने सबकी आंखें नम कर दी थीं। अनन्या ने विक्रम का हाथ पकड़ा, और राजेश जी ने सुनीता जी की तरफ देखा। मीना जी की आंखों में आंसू थे, लेकिन उनके चेहरे पर एक सुकून भरी मुस्कान थी, क्योंकि उन्हें यकीन था कि रिहा अब एक ऐसे परिवार की बेटी बनने वाली थी, जो उसे दुनिया की सारी खुशियां देगा।
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