
सब लोग कमरे के बाहर खड़े थे और राहाकी बातें सुनकर एक पल के लिए सब खामोश हो गए। अनन्या की आँखों में आँसुओं के साथ-साथ एक हल्की सी मुस्कान थी। उसने विक्रम की तरफ देखा, और विक्रम ने उसका हाथ और जोर से पकड़ लिया।
राजेश जी और सुनीता जी ने भी एक-दूसरे को देखा, जैसे बिना बोले ही कह रहे हों कि आज उनकी जिंदगी का सबसे खूबसूरत दिन होने वाला है। मीना जी, जो राहा को इतने सालों से अपनी बेटी की तरह संभाल रही थीं, उनके चेहरे पर सुकून था, लेकिन थोड़ा सा दर्द भी था, क्योंकि राहा अब उनके पास नहीं रहेगी। फिर भी, वो जानती थीं कि मल्होत्रा परिवार रिहा को वो सब देगा, जो वो आश्रम में नहीं दे पाईं।







Write a comment ...