
अर्जुन के जाने के बाद विक्रम ने राहा को देखा, जो अपनी मम्मा के सीने में छुपी हुई थी। उसने अपनी छोटी सी उंगली मुँह में डाल रखी थी और फिर से सोने की कोशिश कर रही थी।
सुनीता जी और राकेश जी राहा को देखकर मुस्कुरा रहे थे, उनके चेहरे पर हल्की सी स्माइल थी।







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