
राहा अपनी बड़ी-बड़ी पलकों से सबको देख रही थी। तभी अनन्या और सुनीता भी आए और सबसे मिलने लगे। शिव जी ने राहा को देखा और कहा, "अरे बच्चा, आपको आपके नानू से नहीं मिलवाया ना, यहाँ आओ।
**वैसे सुनीता जी के भाई विक्रम के मामा हुए, तो राहा के वो नानू हुए ना? मुझे तो यही लगता है, आपको क्या लगता है, बताना। फिर कबीर और दर्श उसके चाचू होंगे कि बड़े पापा होंगे या मामा? मैं तो कन्फ्यूज हूँ, मैं क्या करूँ? 😟"**







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