
एक कमरे में, जो पूरा काला था, वहाँ कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। अंधेरा इतना गहरा था कि सांस लेना भी भारी लगे। उस कमरे में एक लड़की को बांधा हुआ था। उसकी हालत बहुत खराब थी, जैसे किसी ने उसे बुरी तरह पीटा हो। उसके चेहरे पर चोट के गहरे निशान थे, होंठ फटे हुए, आँखें सूजी हुईं। उसके हाथों में लोहे की बेड़ियाँ थीं, जो उसकी कलाइयों को काट रही थीं। खून की बूंदें टपक रही थीं, और उसकी सांसें कमजोर पड़ रही थीं।
अचानक कमरे का भारी-भरकम दरवाजा खुला। एक तेज आवाज के साथ चार-पाँच औरतें अंदर दाखिल हुईं। ये कोई साधारण औरतें नहीं थीं। ये थीं फीमेल बॉडीगार्ड्स, हर एक छह फीट की, कसरती बदन, चेहरा पत्थर की तरह सख्त। उनके कद-काठी को देखकर अच्छे-अच्छे मर्दों के पसीने छूट जाएँ। उनकी आँखों में ठंडक थी, जैसे कोई इंसान नहीं, मशीन हो। वो लड़की की तरफ बढ़ीं, उनके कदमों की आवाज कमरे में गूंज रही थी।







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