
सुबह 9 बजे
समर्थ का फोन बजने लगा। उसकी आंखें धीरे से खुलीं। उसने अपने सिर को हल्का सा उठाया और देखा कि मिराल अभी भी उसकी छाती से चिपकी हुई सो रही थी। उसका नरम, गर्म बदन समर्थ की बॉडी से सटा हुआ था। समर्थ का dick अभी भी मिराल की pussy में था, और वो गर्मी और तंगी उसे अब भी महसूस हो रही थी। मिराल की सांसें धीमी और गहरी थीं, जैसे वो किसी सुकून भरे सपने में खोई हो। उसका चेहरा शांत और cute था, और उसके होंठ हल्के से खुले हुए थे।
समर्थ ने एक नजर अपने बगल में रखे फोन पर डाली, जिस पर “देवा” का नाम फ्लैश हो रहा था। लेकिन उसका ध्यान मिराल पर था। उसे अपने अंदर एक गहरी, गर्म फीलिंग महसूस हो रही थी, जैसे वो किसी जादुई पल में हो।
समर्थ ने अपने मन में सोचा, “तुम्हें पता है, तुम मेरा सबसे प्यारा गुनाह हो। हाँ, मुझसे गलती हुई, लेकिन शायद इसी वजह से मुझे तू मिली, मेरी cute baby। तुम्हारे अंदर ऐसा कुछ है, जैसे तू ही मेरा घर हो। मैं पूरी जिंदगी तेरी इस छोटी सी, tight pussy में रहना चाहता हूँ।”







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