
सुबह की हल्की ठंडी हवा कमरे में खुली खिड़की से आ रही थी। राहा और अर्जुन एक-दूसरे से लिपटे हुए बेड पर लेटे थे, उनकी न्यूड बॉडी एक-दूसरे की गर्मी से गर्म थी। रात की चुदाई के निशान बेडशीट पर बिखरे थे, और कमरे में हल्की सी कम की गंध थी। राहा अर्जुन की बाहों में सिमटी हुई थी, उसका चेहरा अर्जुन के कंधे पर टिका था। अर्जुन की उंगलियाँ धीरे-धीरे राहा की नंगी कमर पर घूम रही थीं, जैसे वो उसकी मुलायम स्किन को हर पल फील करना चाहता हो। उसका डिक अभी भी राहा की गर्म चूत में था, रात की गर्मी से और सख्त हो रहा था।
अर्जुन की आँखें खुलीं, और उसने राहा की तरफ देखा। सुबह की रोशनी में उसका चेहरा और भी खूबसूरत लग रहा था। राहा के होंठ हल्के गुलाबी थे, बिखरे बाल उसे और सेक्सी बना रहे थे। अर्जुन ने राहा की गांड पर हल्का सा स्पैंक किया और अपनी भारी आवाज में बोला, “मेरा बच्चा, कल चाचू ने आपको थका दिया ना बाबू? लेकिन ये तो शुरुआत है, अब तो और मजा आएगा।”










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