दोनों गहरी सांसें भर रहे थे। नेहाली के हाथ गीले थे, फिर भी वो संदर्भ की कमर में लिपटे हुए थे। संदर्भ की सांसें भारी थीं। उसके लिए ये फीलिंग एक्सप्रेस करना नामुमकिन था। उसका हार्ड डिक फिर से खड़ा हो रहा था, लेकिन अब वो नेहाली को जिद नहीं कर सकता था।
नेहाली काफी देर तक उसके सीने से लेटी रही। तभी उन्हें दरवाजा खुलने की आवाज आई। नेहाली घबरा गई। उसने दरवाजे की तरफ देखा जहां नॉक हिल रहा था। वो जल्दी से संदर्भ से दूर हुई और हड़बड़ाते हुए बोली,








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