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12 love blooming on my heart

आयुषी अभी भी अपनी बड़ी-बड़ी आँखों से वेदांश को घूर रही थी, जिसमें वो निश्चित रूप से बहुत ज़्यादा क्यूट पाई लग रही थी। वेदांश बस उसे ही देख रहा था, उसके वो प्यारे-प्यारे रिएक्शंस जो वो दे रही थी। थोड़ी देर बाद वो होश में आई और उसने जोर से वेदांश को हग कर लिया। धक्का इतना ज़ोर से था कि वेदांश पूरा झूले पे गिर गया और उसने आयुषी को ठीक से पकड़ लिया अपने चेहरे पे 140 वोल्ट की स्माइल लेकर। और आवाज़ में खनखनाहट के साथ उसने वेदांश से पूछा, "क्या आप  मुझसे प्यार करते हो?" वेदांश ने भी अपने चेहरे पे क्यूट स्माइल लाते हुए अपनी पलकें झपक दीं। वेदांश का जवाब मिलते ही आयुषी उस पर टूट पड़ी और उसने उसके चेहरे पे एक के बाद एक किस कर दी। चेहरे का एक कोना उसने नही  छोड़ दिया होगा। वेदांश तो पहले उसके रिएक्शंस, उसका उस पर कूदना और फिर ये किस देखकर तो शॉक हो गया था कि ये क्या चल रहा है भाई!

किस करते हुए। आयुषी के हॉट वेदांश के होंठ पर रख दिए वह उसे कोई किसी तो नहीं कर रही थी बस सिर्फ दोनों के होंठ टच हो रहे थे और इसी के साथ आयुषी ने अपनी आंखें बंद कर दी और वेदांश की सांसों और  उसके सख्त होठों को फील करने  लगी आयुषी के होठों अपने होठों पर महसूस करके वेदांश जो कब से शोक हुए जा रहा था वह अपने होश में आया और आयुषी के लीपस्  पर प्यार से किस कर रहा था जैसे वह कोई गुलाब का फूल। ज्यादा जोर देने से मुरझा जायेगा आयुषी भी उसकी वह जेंटल किसको महसूस कर रही थी।

थोड़ी देर ऐसे ही एक-दूसरे को प्यार से किस करने के बाद जब आयुषी को सांस लेने में मुश्किल होने लगी, तो उसने वेदांश के कंधे मारना शुरू कर दिया। जिस पर वेदांश ने अपनी किस को रोका और दोनों ही एक-दूसरे की आँखों में देखे हुए लंबी लंबी सांसें ले रहे थे। थोड़ी देर बाद आयुषी  की  जब सांसें नॉर्मल हुईं, तो उसने वेदांश को देखते हुए कहा, "मतलब अब आप मेरे हैं, है न?" उसके इस  सिलि से पर प्यारे सवाल से वेदांश के चेहरे पे एक प्यारी सी स्माइल आ गई।

वेदांश ऐसा इंसान था ही नहीं जो बात-बात पे हंसी के ठहाके लगाता,

लेकिन यहां बात कुछ अलग थी। वेदांश ने अपनी पलकें जपकयी और आयुषी के चेहरे पे एक और स्माइल आ गई, और उसने अपनी आँखें बंद करके वैसे ही वेदांश के सीने से लगने रही । वेदांश भी उसकी पीठ और बालों को  सहला रहा था।

अब वहाँ का माहौल बहुत ही प्यारा और सुकून भरा था। तभी वेदांश का फोन रिंग हुआ और उसने देखा तो उसके असिस्टेंट का कॉल आ रहा था। जब दोनों बालकनी में आए, तब वेदांश ने अपने असिस्टेंट को कहा था कि डिनर का ऑर्डर दे देना, इस वजह से उसका असिस्टेंट अभी डिनर लेकर आ रहा था। वैसे तो ये काम डिलीवरी बॉय भी कर सकता था, लेकिन यहां बात वेदांश की सुरक्षा की थी और अब इसमें आयुषी भी शामिल थी, तो अब वेदांश या फिर उसके कोई सबऑर्डिनेट सुरक्षा के मामले में कोई रिस्क नहीं ले सकते थे, इसलिए असिस्टेंट आया था।

वेदांश ने कॉल पिक किया और उसे ओके कहकर फिर आयुषी की तरफ देखा, जो अपनी आँखों में प्यार लिए उसे ही देख रही थी। वेदांश ने अपनी आँखों और आवाज़ में सॉफ्टनेस लाते हुए आयुषी को देखा और उसके सूखे बालों पे एक किस करते हुए कहा, "चलो, भूख लगी होगी न? डिनर का टाइम हो गया है। जाओ फ्रेश हो जाओ, फिर डिनर करेंगे, ओके?" आयुषी भी अपने सिर को हिलाते हुए बाथरूम में चली गई।

कुछ देर बाद आयुषी फ्रेश होकर आई और डिनर टेबल पे देखा तो वहां वेदांश ने डिनर लगा दिया था। उसने आयुषी को देखा और अपनी तरफ बुलाते हुए उसे चेयर पे बैठा दिया, फिर खुद फ्रेश होने चला गया। जब वह वापस आया तो आयुषी अपने दोनों हाथों से टेबल पे रखे हुए थे और पनीचे अपने चेहरे को हाथों में भरकर ऐसे देख रही थी जैसे वो बेडरूम में कोई नई कहानी हो। उसके चेहरे पर जो मुस्कान थी, वह तो जाने का नाम ही नहीं ले रही थी। वेदांश उसके पास आया और उसे बांहों से पकड़ कर खड़ा किया और खुद बैठा कर आयुषी को अपनी गोदी में बैठा लिया। इस पर आयुषी हंस दी।

वेदांश ने एक पल में डिनर लिया और फिर दूसरा कोर आयुषी की तरफ बढ़ाया। आयुषी ने उसे ले लिया और वेदांश ने फिर दूसरा कोर उसे दिया, लेकिन उसने सिर हिलाकर ना कहा और वेदांश के हाथ को अपने चेहरे पे रखकर उसे खुद ही खिला दिया। अब वेदांश ने एक और कोर आयुषी को खिलाया और आयुषी ने उसे खाया। थोड़ी देर बाद दोनों ने अपना डिनर कर लिया और फिर बेडरूम में चले गए।

वेदांश ने अपना लैपटॉप लिया और थोड़ा काम बचा था, वो करने लगा। आयुषी फ्रेश होने के लिए बाथरूम में चली गई। थोड़ी देर बाद आयुषी आई, उसने एक क्यूट सा कार्टून नाइट ड्रेस पहना था। वेदांश ने उसे एक नजर देखा और फिर अपना काम कंटिन्यू करने लगा। आयुषी ने उसे देखा और फिर ड्रेसिंग टेबल पे जाकर अपना नाइट रूटीन करने लगी, जो उसने इतने दिनों से वेदांश के पास नहीं किया था।

थोड़ी देर बाद वह बेड पे आई, वेदांश का लैपटॉप चुरा लिया और बंद करके उसके गोदी में बैठ गई। वेदांश ने अपने पैर सीधे किए हुए थे और उसकी उपर वाली बॉडी बेड रेस्ट पे आराम से रखी हुई थी। वेदांश ने उसे कुछ नहीं कहा और आयुषी को अपने सीने से लगा लिया। उसकी आँखें बंद कर दीं। थोड़ी देर बाद जब वेदांश ने अपनी सीने में आयुषी की धीमी सांसें महसूस की, तो उसने अपनी आँखें खोलीं और आयुषी को देखा, जो अब सो चुकी थी। वेदांश भी सीधा लेट गया और आयुषी को अपने प्र से अच्छे से एडजस्ट करके सो गया।

सुबह की रौशनी खिड़की से धीरे-धीरे कमरे में घुस रही थी —

curtains की ओट से आती हल्की धूप वेदांश के चेहरे पर पड़ रही थी।

उसने आँखें धीरे-धीरे खोलीं…

पर खुलते ही पहला एहसास ये नहीं था कि सुबह हो गई —

बल्कि ये कि कुछ भारी सा उसके ऊपर है।

वेदांश ने हल्का सा सर घुमाया,

तो देखा — आयुषी उसके सीने से सर सरका चुकी थी,

अब वो पूरी तरह से उसके ऊपर सो रही थी —

उसके हाथ वेदांश के कमर के चारों ओर लिपटे हुए थे,

जैसे उसने उसे पकड़ के रखा हो रातभर।

वो उसके सीने पर अपनी cheek टिकाए,

नींद में हल्की सी मुस्कुरा रही थी।

वेदांश के चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान आ गई —

उसने हल्के से उसकी पेशानी पे एक soft kiss दी।

उसके बालों को पीछे किया,

और उसके lips को बस एक सेकंड के लिए छुआ… एक कोमल, लेकिन प्यारा kiss —

जिसमें ना कोई जल्दबाज़ी थी, ना कोई लालच —

बस मोहब्बत थी।

आयुषी हल्के से कुनमुनाई,

लेकिन अभी भी आँखें बंद थीं।

वेदांश (धीरे से उसके कान के पास फुसफुसाया):

"Good morning, little heart … इतना हक़ से कोई मेरे ऊपर कैसे सो सकता है?"

आयुषी ने हल्की सी आंखें खोलीं,

एक नज़र वेदांश को देखा, और फिर मुस्कुराई —

वो वो वाली मुस्कान थी जो सिर्फ नींद से उठते ही अपने प्यार को देखकर आती है।

आयुषी (नींद में ही):

"क्योंकि मेरा बिस्तर आप हो…"

वेदांश हँस पड़ा —

उसने फिर से उसे सीने से कसकर लगा लिया।

आयुषी (धीरे से):

" आप  बहुत गर्म हो, इंसानी हीटर हो आप तो …"

और फिर वो उसके गले में छुप गई।

वेदांश ने उसे अपनी बाहों में और कस लिया —

और उस पल, उस धूप, उस चुप में…

बस वो दो लोग थे — एक-दूसरे में खोए हुए।आयुषी अब पूरी तरह वेदांश की बाहों में थी।

नींद की हल्की सी परत उसकी आँखों से उतर चुकी थी —

और अब वो एकटक वेदांश को देख रही थी।

वेदांश की नज़रें भी उसी पर टिकी थीं,

लेकिन इस बार उस नज़र में सिर्फ softness नहीं थी —

उसमें एक भूख थी…

उसके करीब होने की, उसके हर एहसास को छू लेने की।

वो धीरे-धीरे झुककर उसके चेहरे के और करीब आया,

उनकी साँसें अब एक-दूसरे की त्वचा को छू रही थीं।

आयुषी की पलकों ने एक बार झपकने की कोशिश की,

लेकिन वेदांश की आँखें उसे पकड़ चुकी थीं।

वेदांश (बहुत धीमे से):

"मुझे तुम्हारा सब कुछ चाहिए… अभी… इसी पल…"

और फिर — बिना और एक सेकंड गंवाए,

उसने अपने होंठ आयुषी के होंठों पे रख दिए।

वो kiss धीमा था… लेकिन intense।

पहले हल्के से… जैसे testing the taste of longing —

फिर धीरे-धीरे गहरा होता गया,

उनके बीच की साँसें एक-दूसरे में घुलने लगीं।

आयुषी ने वेदांश की गर्दन को थाम लिया —

उंगलियाँ उसके बालों में उलझ गईं।

वेदांश का हाथ उसकी कमर को खींच कर और पास ले आया,

अब उनके बीच कोई फासला नहीं था —

सिर्फ धड़कनों की रफ़्तार थी… और होंठों की बेचैनियाँ।

वो kiss अब wild नहीं था,

पर उसमें एक raw emotion था,

एक ऐसी feeling जो लफ़्ज़ों से नहीं, सिर्फ chah से निकली थी।

कुछ पल बाद, जब उनके होंठ अलग हुए,

दोनों की साँसें तेज़ थीं… आँखें आधी बंद… और दिल एकदम loud।

आयुषी (हौले से):

"आप … कभी दूर मत जाना…"

वेदांश (उसके माथे पे kiss देते हुए):

"अब जहाँ mera cute sa bachha … वही मेरी दुनिया है।"

आयशी फिर से वेदांश के सीने में लेट गई, और वेदांश उसके बालों से खेलने लगा।

आयुषी (धीरे से): वेदांश...

वेदांश थोड़ा चौक गया। huh ? क्या कहा?

"उसके नन्हे से दिल"

यही तो सुनना चाहता था वो। उसकी प्यारी सी आवाज़ में अपना नाम... जैसे कोई ख्वाब सच हो गया हो।

वेदांश (थोड़ा चौंकते हुए): हाँ? क्या कहा a आपने  बेबी?

आयुषी  थोड़ी सी हेजिटेट करते हुए, नज़रे झुकाकर: वो... मैंने कहा... वे... वेदांश...

वेदांश के चेहरे पर एक बड़ी सी स्माइल आ गई। उसने बिना कुछ कहे आयुषी  के पूरे चेहरे पर अपने होठों की बारिश कर दी।

"मेरी क्यूटीपाई, कोई इतना अडोरेबल कैसे हो सकता है यार..."

उसके दिल ने उसी पल डिसाइड कर लिया — ये लड़की अब उसकी दुनिया है।

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