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आयुषी के बाथरूम में, बाथटब का गर्म पानी उनकी त्वचा को सहला रहा था। वेदांश टब में बैठा था, उसका नंगा बदन पानी की गर्माहट में डूबा हुआ था। आयुषी उसकी गोद में थी, उसके पैरों के बीच, इतनी करीब कि उनकी साँसें एक-दूसरे से टकरा रही थीं। लैवेंडर बॉडी वॉश की खुशबू और भाप ने माहौल को और गहरा कर दिया था।

वेदांश ने आयुषी की कमर को अपनी मजबूत बाहों में जकड़ा और उसे और करीब खींच लिया। उसकी उंगलियाँ धीरे-धीरे आयुषी की पीठ पर फिसलीं, और आयुषी की साँसें तेज हो गईं। उसने अपनी आँखें बंद कर लीं, वेदांश के स्पर्श को हर पल महसूस करते हुए। वेदांश ने अपनी ठुड्डी आयुषी की गर्दन के पास लाई और वहां हल्के से अपने होंठ रखे, फिर धीरे-धीरे नीचे की ओर बढ़ा, आयुषी के कंधों तक। आयुषी के बदन में एक सिहरन सी दौड़ गई।

आयुषी, इन सारे एहसासों को जीते हुए, अपनी आँखें बंद किए हुए थी।

वो वेदांश  की kiss और उसके hard  part को,

जो उसकी hip chick  बीच की लाइन के पास छू रही थी, महसूस कर रही थी। साथ ही, वो लंबी-लंबी साँसें ले रही थी।

पानी में उनकी हरकतें धीमी लेकिन गहरी थीं। आयुषी ने अपने हाथ वेदांश की छाती पर रखे, उसकी धड़कन को महसूस करते हुए। वेदांश ने आयुषी को थोड़ा पीछे झुकाया, और उनके होंठ एक गहरी, पैशनेट kiss में मिल गए। वो kiss इतनी तीव्र थी कि दोनों उस पल में पूरी तरह खो गए। आयुषी ने अपनी टांगें वेदांश की कमर के इर्द-गिर्द लपेट दीं, और पानी की छपछप के साथ उनकी करीबी और गहरी हो गई।

वेदांश की उंगलियाँ अब आयुषी की जांघों पर थीं, हल्के से दबाव डालते हुए, और आयुषी ने अपनी गर्दन पीछे झुका दी, एक गहरी साँस लेते हुए। उनकी त्वचा एक-दूसरे से सट रही थी, और गर्म पानी ने उस एहसास को और तीव्र कर दिया। वेदांश ने आयुषी के कान के पास धीमे से कहा, "you are so cute ," और आयुषी ने जवाब में सिर्फ उसे और जोर से पकड़ लिया।

उस बाथटब में, भाप और खुशबू के बीच, दोनों एक-दूसरे में पूरी तरह डूब गए। हर स्पर्श, हर kiss, और हर साँस उस पल को और गहरा कर रही थी, जैसे वो दोनों सिर्फ एक-दूसरे के लिए ही बने हों।

थोड़ी देर बाद दोनों तैयार हो चुके थे। आयुषी ने ब्लैक रंग की टाइट जींस और ऊपर व्हाइट पफ स्लीव टॉप पहना हुआ था। वहीं वेदांश ने पूरी तरह ब्लैक आउटफिट चुना—ब्लैक पैंट के साथ ब्लैक शर्ट। आयुषी की 5 फुट 5 इंच की हाइट और वेदांश की 6 फुट 5 इंच की हाइट के साथ दोनों बहुत ही एलिगेंट और स्टाइलिश लग रहे थे।

वेदांश ने अपने असिस्टेंट को फोन करके गाड़ी निकालने को कहा, क्योंकि आज वो अपने दोस्तों के यहाँ गेट-टुगेदर के लिए जा रहा था, और आयुषी भी उसके साथ थी। आयुषी ने अपना फोन और क्यूट सा बनी वाला पर्स उठाया, फिर वेदांश के बड़े से हाथ में अपना छोटा सा हाथ फिट कर लिया। दोनों एक-दूसरे के साथ चलते हुए ऐसे लग रहे थे, जैसे कोई परफेक्ट जोड़ी।वेदांश ने आयुषी का हाथ थामा और दोनों लिफ्ट की ओर बढ़े। लिफ्ट के शीशे में खुद को देखते हुए आयुषी ने वेदांश की तरफ देखा, “ब्लैक शर्ट में तो आज कोई बहुत ज़्यादा सीरियस लग रहे हैं।”

वेदांश ने हल्की-सी मुस्कान दी, “तुम्हारे साथ हूँ... थोड़ा सीरियस रहना ज़रूरी है।”

आयुषी की नज़रों में हल्की शरारत चमकी, “ओह, तो मतलब मेरे साथ टाइम स्पेंड करना रिस्की है?”

"बहुत ज़्यादा," उसने बिना पलकें झपकाए जवाब दिया।

लिफ्ट की ‘टिंग’ के साथ दरवाज़े खुले, और बाहर पहले से तैयार ब्लैक कार उनका इंतज़ार कर रही थी। वेदांश ने आदतन पहले दरवाज़ा खोला और आयुषी को बैठाया, फिर खुद सामने बैठ गया।

कार के अंदर हल्की महक थी — जैसे स्पेशली आज के लिए किसी क्लासिक कोलोन का इस्तेमाल किया गया हो। बैकग्राउंड में स्लो जैज़ म्यूज़िक बज रहा था, जो सफर को और भी फिल्मी बना रहा था।

आयुषी ने बाहर झाँकते हुए कहा, “कितना अजीब लगता है न… शहर वही है, रास्ते वही हैं, लेकिन साथ बदल जाए तो सब कुछ नया-सा लगने लगता है।”

वेदांश ने एक नज़र उस पर डाली, “शहर तो वही है, हाँ... पर साथ अगर सही हो, तो रास्ते भी कम पड़ जाते हैं।”

आयुषी कुछ नहीं बोली, बस खिड़की से आती हवा में बाल उड़ने दिए और हल्के-से मुस्कुरा दी।थोड़ी ही देर में कार शहर की भीड़-भाड़ से निकल कर एक शांत, हरे-भरे रास्ते पर दौड़ रही थी। आस-पास सिर्फ हरियाली, और हवा में मिट्टी की भीनी-भीनी खुशबू... और कुछ ही समय में कार एक भव्य गेट के सामने आकर रुकी।

ये वही जगह थी — शहर से बाहर, एक बेहद आलीशान फार्महाउस। सामने की ओर दूर-दूर तक फैला हरा-भरा मैदान था, बाईं तरफ एक नीला और शांत झील (lake) अपनी सतह पर शाम की हल्की-सी परछाइयाँ समेटे हुए चमक रहा था। दाईं ओर कुछ खूबसूरत घोड़े खुले मैदान में दौड़ रहे थे — उनकी टापों की आवाज़ हवा में गूंज रही थी। सब कुछ किसी राजसी महल की तरह सजा था।

फार्महाउस की बॉलकनी से लेकर बगीचे तक, सब जगह महंगे डेकोर की झलक थी — और फिर, जैसे ही वेदांश की कार गेट के अंदर दाख़िल हुई, दरवाज़े पर खड़े दो लोग एक साथ उनकी ओर बढ़े।

पहचानने में देर नहीं लगी — वो थे आर्यन शर्मा और उनकी पत्नी लव शर्मा।

आर्यन शर्मा — देश के होम मिनिस्टर और वेदांश का पुराना, बेहद करीबी दोस्त। और उनकी पत्नी लव — जो आज की सबसे मशहूर सिंगर थीं, ग्लैमरस और ग्रेसफुल, जिनकी आवाज़ के करोड़ों दीवाने थे।

वेदांश कार से उतरा और आर्यन ने तुरंत उसे अपनी बाहों में भर लिया।

आर्यन (हँसते हुए): “कैसे हो? वैसे तुम तो खडूस पहले से थे, अब तो तुम्हारा वो दोस्त आरुण भी नज़र नहीं आता... कहाँ है वो?”

वेदांश (थोड़े सख्त लहजे में, आँखों में हलका सा दर्द): “उसने मेरी सबसे कीमती चीज़ को चोट पहुँचाई थी... अब अपनी सज़ा भुगत रहा है।”

आर्यन ने बात समझते हुए सिर हिलाया, “ओके...” फिर उसकी नज़र आयुषी पर पड़ी — जो अब तक कार के दूसरी तरफ खड़ी थी, अपने बनी वाले पर्स को ठीक करती हुई।

आर्यन (शरारत से मुस्कुराते हुए): “अरे वाह... ये छोटी बच्ची कौन है? इसे तोहफे में लाए हो क्या?”

आयुषी की आँखें थोड़ी बड़ी हुईं, और वो कुछ कहती इससे पहले ही वेदांश ने बिना मुस्कुराए जवाब दिया —

वेदांश: “ये... मेरी पसंद है।”

आर्यन और लव दोनों ने हैरानी और फिर हल्की मुस्कान के साथ एक-दूसरे को देखा।

लव आगे बढ़ी और आयुषी को गले से लगाया, “Hi sweetheart, मैं लव... तुम बहुत प्यारी हो!”

आयुषी ने थोड़ा हिचकिचाते हुए जवाब दिया, “Hi... I’m Ayushi.”जैसे ही वेदांश और आयुषी आर्यन-लव के साथ अंदर फार्महाउस में दाख़िल हुए, वहाँ का माहौल और भी शानदार लगा — अंदर की सजावट बेहद क्लासी थी। गोल्डन वॉर्म लाइट्स, कांच की बड़ी-बड़ी खिड़कियाँ, और हर कोने में खूबसूरती से सजाया गया था। लेकिन रुकिए... शो तो अब शुरू होने वाला था।

दरवाज़े पर एक के बाद एक चार गाड़ियाँ आकर रुकीं — और दोस्तों की धमाकेदार एंट्री हुई।

पहली गाड़ी से निकले करण और अलिशा।

करण — देश की सबसे बड़ी एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री का ओनर, OTT प्लेटफॉर्म से लेकर प्रोडक्शन हाउस तक, सब कुछ उसके अंडर चलता था। और उसकी पत्नी अलिशा — इंटरनेशनल मॉडल, जो अपने स्टाइल और एलिगेंस से किसी भी इवेंट को रेड कार्पेट बना देती थी।

अलिशा ने एयर-ग्लासेस उतारे, बाल पीछे किए और मुस्कुराई — “बोलो स्टार लोगों, शो की जान आ गई?”

दूसरी गाड़ी से उतरे डॉक्टर रित्विक और डॉ. नैन्सी।

रित्विक — देश का टॉप न्यूरोसर्जन, और नैन्सी — बच्चों की मशहूर विशेषज्ञ डॉक्टर, दोनों ही मिलकर एक बड़े चैरिटी हॉस्पिटल भी चलाते थे। उनके आने से माहौल में एक अलग ही क्लासिकल ग्रेस भर गई।

तीसरी गाड़ी से आए दो लड़के — अर्जुन और सम्यक।

अर्जुन — क्रिएटिव, थ्रिलिंग माइंड वाला — जो थ्रिलर उपन्यास लिखता था और उसका चैनल दुनिया भर में मशहूर था।

और सम्यक — शांत लेकिन गहराई वाला — दुनिया घूम चुका ट्रैवल ब्लॉगर, जिसके अनुभव हर पार्टी की जान होते थे।

और आखिरी में आई एक लड़की — तान्या।

तान्या — इवेंट प्लानर, बेहद एनर्जेटिक और हर gathering को ‘मूविंग मैजिक’ बना देने वाली। उसकी मुस्कान में इतनी पॉज़िटिव वाइब थी कि आते ही सबके चेहरों पर हँसी आ गई।

तान्या (हँसते हुए): “ओ हेलो! ये पार्टी थी या प्राइवेट प्रेस कॉन्फ्रेंस? सब इतने VIP लगे!”

करण: “क्योंकि सब हैं ही VIP, मिस तान्या! तुम्हारे आने से अब बस DJ की कमी रह गई!”

अलिशा (आयुषी को देखते हुए): “And who is this cutie? Don’t tell me... हमारा वेदांश अब अकेला नहीं रहा?”

वेदांश (सिर्फ एक साइलेंट स्माइल देता है, लेकिन आयुषी की तरफ एक नज़र डालकर): “जवाब तुम सब खुद समझ जाओगे।”

सबकी हँसी, हसीन लाइट्स और फार्महाउस   का शानदार माहौल… एक परफेक्ट नाइट की शुरुआत थी।रात का खाना एक खुले लॉन में रखा गया था — लंबा-चौड़ा डाइनिंग टेबल, जिसके ऊपर फेयरी लाइट्स लटक रही थीं और चारों ओर हल्की म्यूज़िक की आवाज़ बह रही थी। हर जोड़ी अपनी सीट पर थी, हँसी, शोर, और वाइन के गिलासों की टकराहट के बीच एक सजीव-सा माहौल।

करण (हँसते हुए): “याद है कॉलेज ट्रिप में आर्यन ने गलती से टीचर को 'बेबी' कह दिया था?”

आर्यन (हँसते-हँसते): “अबे बंद कर! और वो जो तुमने प्रिंसिपल की कार में डिटर्जेंट डाल दिया था! सब झाग निकलने लगे थे!”

सब हँसी में झूम गए। आयुषी भी मुस्कुरा रही थी — वो सबके बीच नई थी, लेकिन किसी ने उसे अजनबी फील नहीं होने दिया।

तान्या (आयुषी की तरफ देखकर): “और तुम आयुषी, बताो — ये वेदांश तुम्हारे साथ रोमांटिक होता है या वही ऑफिस वाला सीरियस लुक लेकर घूरता है?”

आयुषी हँस पड़ी, और कुछ जवाब देने ही वाली थी कि वेदांश बीच में बोल पड़ा —

वेदांश (धीमे लहजे में): “जो ज़रूरी होता है, वही दिखाता हूँ।”

एक पल को सब चुप... फिर हँसी फिर से छा गई।

लव (थोड़ा इमोशनल होकर): “हम सब बहुत बदल गए हैं... लेकिन कुछ चीज़ें वैसी की वैसी हैं — ये दोस्ती, ये पागलपन, और ये साथ।”

नैन्सी: “और हाँ, जो साथ आज भी निभा रहे हैं — उनकी वैल्यू बहुत बड़ी है। वरना ज़िंदगी में सबसे पहले दोस्त ही छूटते हैं।”

सम्यक: “हमने एक-दूसरे को वक़्त दिया, स्पेस दिया… और शायद यही वजह है कि हम आज भी साथ हैं।”

इतने में आर्यन ने वाइन के गिलास उठाए — “To us. To old stories, and new beginnings.”

सबने गिलास उठाए, और चीयर्स की आवाज़ों के बीच एक जादू सा भर गया फिज़ा में।

डिनर टेबल पर सब आराम से बैठे थे, हँसी-मज़ाक चलता रहा, लेकिन तभी नैन्सी ने कुछ याद करते हुए लव की ओर देखा।

नैन्सी (हाथ में वाइन का ग्लास थामे, भौंहें उठाकर):

"वैसे लव... सान्वी नहीं आई? तुमने उसे बुलाया तो था ना?"

लव (थोड़ा कंधे उचकाते हुए):

"मैसेज तो किया था, पर उसने कहा कि शायद आज नहीं आ पाएगी। बोले, कल आएगी। वैसे भी... हम तीन दिन तो रुकने वाले हैं, तो आ ही जाएगी।"

तान्या (बात पकड़ते हुए, गुनगुनाती-सी):

"और ये आरुन कहाँ गायब है? आया ही नहीं आज..."

लव (हल्की सांस छोड़ते हुए, मुस्कराकर):

"शायद वेदांश ने उसे कोई काम दे दिया है। तुम तो जानती हो ना वेदांश के गुस्से को...!"

दोनों ने एक-दूसरे की ओर देखा और जैसे एक पुरानी आदत के तहत, साथ में गर्दन हिलाई — जैसे कह रहे हों, “हाँ... वो तो है।”

लेकिन इस डिनर टेबल पर आज कुछ अलग था।

सबकी नज़रें वेदांश की ओर जाती थीं, बार-बार।

  क्योंकि जो इंसान खाने के वक़्त एक शब्द भी नहीं बोलता था — वो आज... अयुषी से बात कर रहा था।

ना ज़ोर से, ना सबके सामने... बस धीमे से। और जो भी चीज़ अयुषी की प्लेट में खत्म होती, वेदांश बिना कुछ कहे, अपनी से निकालकर उसमें रख देता।

सबने नोटिस किया। पर कोई बोला नहीं।

अयुषी का पेट अब पूरी तरह भर चुका था — वो बार-बार वेदांश की तरफ देख रही थी, जैसे कोई बच्चा होता है जो बोल नहीं सकता, बस चेहरा बना देता है।

उसने अपनी आँखें थोड़ी बड़ी कर लीं, होंठ सिकोड़ लिए और एकदम मासूम सा "puppy face" बनाकर वेदांश को देखा।

अयुषी (धीरे से, मासूम आवाज़ में):

"वेदांश... अब नहीं खाना..."

वेदांश ने एक पल उसकी आँखों में देखा।

एक अजीब softness थी उस नज़र में। वो softness जो हर किसी के लिए नहीं थी।

वो आदमी जो business deals में emotions नहीं देखता था, आज इस छोटी-सी बात पर इतना गहराई से देख रहा था...

वेदांश (धीमी, almost फुसफुसाहट जैसी आवाज़ में — लेकिन आँखों में softness और जुबां में care):

"चलो... सिर्फ last bite खा लो, ओके?"

"फिर... मत खाना।"

कहते हुए उसने प्यार से अपनी प्लेट में से थोड़ा खाने का हिस्सा उठाया, और अपनी उंगलियों से खुद अयुषी की प्लेट पूरी साफ़ कर दी।

जैसे कह रहा हो — तुमने बस कहना है, बाकी सब मैं कर लूंगा।

अयुषी मुस्कुराई — वो मुस्कान जो सिर्फ सुकून वाली होती है।

और दूर बैठे दोस्त — वो सब देख रहे थे।

पर आज... किसी ने कुछ नहीं कहा।

क्योंकि कुछ पल... बस ख़ामोशी से महसूस किए जाते हैं।

रात गहराती जा रही थी, और सब लोग अपने पुराने कॉलेज दिनों की तरह मज़े कर रहे थे। सम्यक ने कहा था कि आज रात जैसे कॉलेज के दिन थे, वैसे ही सबको बेतहाशा बातें करने का मौका मिलेगा।

सर्वेंट्स ने गद्दे बिछाए थे, और अब सब अपनी-अपनी जगह पर आराम से बैठ गए थे। कुछ लोग अपने गद्दों पर लेटे हुए थे, तो कुछ कपल्स एक-दूसरे की बाहों में थे — जैसे समय थम सा गया हो।

आयुषी और वेदांश कुछ और ही थे, वो दोनों ही अपनी दुनिया में खोए हुए थे। आयुषी, जो पहले थोड़ी असहज थी, अब वेदांश की गोदी में आराम से बैठी थी। उसके चेहरे पर वही प्यारी सी मुस्कान थी, जो उसे सभी से खास बनाती थी।

लव, नैन्सी और तान्या बार-बार आयुषी के गालों को खींच रही थीं, जैसे वो कोई छोटी सी बच्ची हो।

लव तो कभी उसके गालों पर प्यारी सी चुंबन भी कर रही थी — जैसे वो न हो, बल्कि उनकी प्यारी छोटी बहन हो।

वेदांश, जो कभी बहुत ही गुस्सैल और खामोश रहता था, आज पॉज़ेसिव बाबू बनकर आयुषी के गाल को बार-बार साफ़ कर रहा था — जैसे लव ने जो किस किया हो, वो नहीं चाहिए था।

आर्यन (लव को अपने पास खींचते हुए):

"अरे! ऐसा मत करो, वरना ये Yeti  तुम्हें कच्चा खा जाएगा!"

^हिममानव" (Yeti) के लिए भी होता है, जो हिमालय में रहने वाली एक पौराणिक, विशालकाय प्राणी की कहानी से जुड़ा है। ^

लव ने सिर झुकाते हुए, आर्यन की बात मानी और बस मुस्कुरा दी।

उसकी हंसी में भी एक प्यारी सी बुआई थी, जो सबको एहसास दिला रही थी कि वो सिर्फ बच्ची नहीं — वो एक फुल-ग्रोविंग और समझदार लड़की भी है।

वहीं दूसरी तरफ आयुषी, जो वेदांश की गोदी में बैठी थी, उसके चेहरे पर अजीब सी शांति थी। उसे उन सब बड़े लोगों के बीच एक छोटी सी बच्ची की तरह महसूस हो रहा था, जो सबका ध्यान अपनी ओर खींच रही थी। वो पल उसके लिए शायद सबसे ज़्यादा ख़ास था।

वेदांश, जो कभी उसकी गोदी में बैठने वाला था, आज उसकी दुनिया था — और वह पल वही था, जब आयुषी ने महसूस किया कि इस दिल में जगह सिर्फ वो है।

सब दोस्त हंसी-मज़ाक कर रहे थे, बातें कर रहे थे, लेकिन आयुषी का मन तो सिर्फ एक ही जगह पर था — वह था वेदांश। और वेदांश भी बारी-बारी से आयुषी को देखता, मुस्कुराता और फिर उससे बहुत सारा प्यार देता था, जैसे वह किसी अनमोल रत्न को अपने पास रखना चाहता हो।

तान्या, जो अब तक सबकी बातों में घुली हुई थी, अचानक आयुषी की तरफ देखती है —

वो वेदांश के सीने से लगी, छोटी बच्ची सी शांति से सो रही थी।

तान्या ने मुस्कुराते हुए कहा,

"अरे वेदांश! तुम्हारा 'नन्हा सा दिल' तो सो गया। एक काम करो, इसे ठीक से सुला दो।"

सबकी नज़रें एक साथ वेदांश और आयुषी की तरफ घूम गईं।

सिर्फ एक लड़की नहीं, वो सबके बीच एक एहसास बन चुकी थी।

वेदांश ने हल्की सी सांस ली और बोला,

"नहीं... ये यहाँ कंफर्टेबल नहीं होगी। मैं इसे लेकर अपने कमरे में चला जाता हूँ, तुम सब बातें करो।"

अर्जुन (थोड़ी शरारत से):

"अबे भाई! ऐसे कैसे? तू तो वापिस आया ही है, पहले यहाँ बातें पूरी कर, फिर जा के सुला देना।"

वेदांश (आयुषी की तरफ देखते हुए, नर्मी से):

"नहीं यार, ये अगर आँख खोलकर मुझे न देखे तो पैनिक कर जाएगी।"

आर्यन (हँसते हुए):

"तो यहीं सुला दे न! देख, गद्दे भी ठीक हैं और हम कोई तेज़-तेज़ बातें थोड़ी कर रहे हैं जो इसे डिस्टर्ब करें।"

थोड़ी देर की बहस के बाद, वेदांश ने हार मान ली।

उसने बहुत ही प्यार से आयुषी को अपनी गोदी से उठाया और धीरे से पास वाले गद्दे पर लिटा दिया।

उसके बालों को सुलझाया, चादर उसके ऊपर ठीक से डाली और अपने हाथ से एक हल्का सा किस उसकी पेशानी पर रखा।

उस पल सन्नाटा सा छा गया, जैसे सबको उस पल की पवित्रता महसूस हुई हो।

लव (तेज़ी से बोलती है, मुस्कुराते हुए):

"तो ठीक है फिर, मैं इस क्यूटी पाई के साथ ही सोऊँगी।"

उसने झट से जाकर आयुषी के पास लेटते हुए उसका हाथ पकड़ लिया, जैसे कोई अपनी गुड़िया के पास सोती है।

नैन्सी और तान्या भी हँसते हुए बोले,

"तो हम भी पास ही लेट जाते हैं, ताकि हमारा बेबी प्रोटेक्टेड रहे!"

तभी तीनों लड़कों की एक साथ आवाज़ आई — "NO..."

जो और कोई नहीं बल्कि वेदांश, आर्यन, और रित्विक थे।

तीनों की पॉज़ेसिवनेस देख सब हँस दिए।

वेदांश ने भी उन तीनों लड़कियों को अपनी "Little Heart" के पास से दूर कर दिया,

और सब फिर से अपनी बातों में लग गए।

वेदांश, जो अब भी वहीं बैठा था, बस एक नज़र आयुषी पर डालता है —

वो मुस्कुरा रही थी नींद में भी…

वो मुस्कान, जो वेदांश के गुस्से भरे चेहरे को भी पिघला देती थी

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