
वेदांश अभी भी आयुषी को अपनी गोद में लिए बैठा था, और आयुषी भी उसके सीने पर सिर रखे आराम से बैठी थी। दोनों के बीच अगर कुछ था, तो वो था सुकून, जो दोनों को महसूस हो रहा था।
अचानक वेदांश के चेहरे पर हल्की सी स्माइल आ गई, क्योंकि आयुषी के पेट के चूहे (मतलब भूख) ने दौड़ना शुरू कर दिया था।









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