
जैसे ही वेदांश ने आयुषी की सिसकियों और रोने की आवाज़ सुनी, वो पल में होश में आ गया। अभी तक तो वो इस बात से शॉक्ड था कि कोई उसके गले लग गया, लेकिन जब उसने सिर नीचे करके देखा, तो आयुषी थी, जो हिचकियाँ लेते हुए रो रही थी। उसका छोटा सा चेहरा आँसुओं से भीगा हुआ था, नाक और गाल लाल हो चुके थे। वो इतनी जोर से रो रही थी कि उसे साँस लेने में भी दिक्कत हो रही थी।
वेदांश का दिल जैसे एक पल के लिए रुक सा गया। उसने फटाफट सोफे पर बैठते हुए आयुषी को अपनी गोद में बिठा लिया। उसका एक हाथ धीरे से आयुषी की पीठ पर था, और दूसरे से उसने आयुषी के गीले गालों को प्यार से सहलाया। उसकी आँखों में डर साफ दिख रहा था—वो डर जो वेदांश राठौर जैसा इंसान कभी नहीं दिखाता था।









Write a comment ...