
तभी उसे अपने गालों पर किसी का कठोर हाथ महसूस हुआ, जिसे वो कैसे नहीं पहचानती। उसने आँखें खोलीं और निहार को देखा, जो अब तक दरवाजे के पास खड़ा हुआ दोनों माँ-बेटी की बातचीत सुन रहा था।
निहार को देखकर निविशा की आँखों में गुस्सा छा गया। वो गुस्से में लेकिन धीमी आवाज़ में बोली, “क्यों आए हो आप यहाँ? जाइए और मैं आखिरी बार बोल रही हूँ — मेरी बच्ची से दूर रहिएगा। वो सिर्फ मेरी है।”









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