
Spoiler : “डेडा… अब मुझे बहुत अच्छा लग रहा है… बहुत दिन हो गए… मुझे फिर से…चुदाई चाहिए… बहुत तेजी से… पूरी तरह भर दो अपनी बच्ची की चूत को… फाड़ दो उसे…”
चारों भाई नेहाली के थके, काँपते शरीर को धीरे से उठाया। नेहाली की आँखें आधी बंद थीं, शरीर बिल्कुल बेजान सा पड़ा था। सामर्थ्य ने उसे गोद में उठा लिया। नेहाली का सिर सामर्थ्य की छाती से सट गया। उसकी दोनों टाँगें अभी भी फैली हुई थीं, चूत से लगातार गाढ़ा काला-लाल तरल रिस रहा था।











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